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छपरा का धर्मनाथ धन्नी शिव मंदिर: अर्द्धनागेश्वर शिवलिंग और खास प्रसाद

छपरा का धर्मनाथ धन्नी शिव मंदिर: दुर्लभ अर्द्धनागेश्वर शिवलिंग और खास प्रसाद की अपनी पहचान

 धर्म | आस्था | छपरा

छपरा का धर्मनाथ धन्नी शिव मंदिर रात में रोशनी से सजा हुआ

सरयू नदी के किनारे शहर के दौलतगंज-रतनपुरा मोहल्ले में स्थित धर्मनाथ धन्नी शिव मंदिर सारण जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह मंदिर हजारों वर्ष पुराना है। मंदिर का विशाल परिसर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में प्रवेश करते ही यहां एक ओर वीर हनुमान जी का मंदिर है, तो दूसरी ओर भगवान शंकर और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित है। परिसर में भगवान राम-सीता, गणेश जी और मां काली सहित अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं। बीच में मां दुर्गा का मंदिर और सबसे अंत में मां गंगा की प्रतिमा स्थापित है।

धर्मनाथ धन्नी मंदिर में वीर हनुमान और भगवान शंकर-पार्वती की प्रतिमाएं

धर्मनाथ धन्नी मंदिर परिसर में मां दुर्गा और मां गंगा की प्रतिमाएं

बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण संत धर्मनाथ जी ने कराया था। जिस स्थान पर आज मंदिर स्थित है, वह कभी घने जंगल से घिरा हुआ था। संत धर्मनाथ जी इसी क्षेत्र में ध्यान और तपस्या किया करते थे। मान्यता है कि एक दिन उन्हें यहां शिवलिंग प्राप्त हुआ, जिसके बाद उन्होंने उसकी पूजा-अर्चना शुरू कर दी। बाद में उनके द्वारा यहां मंदिर का निर्माण कराया गया।

मंदिर में स्थापित शिवलिंग का अर्द्धनागेश्वर स्वरूप अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। शिवलिंग के बगल में पिंड भी स्थापित हैं, जिन्हें यहां की महंत परंपरा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता के अनुसार मंदिर के किसी महंत के महाप्रयाण के बाद उनकी स्मृति में यहां पिंड स्थापित किया जाता है। अब तक मंदिर परिसर में कुल 13 पिंड स्थापित किए जा चुके हैं। 

सावन और महाशिवरात्रि में उमड़ती है भीड़

धर्मनाथ धन्नी मंदिर में फूलों से सजा अर्द्धनागेश्वर शिवलिंग और महंत परंपरा के पिंड

मंदिर में पूरे साल श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन महाशिवरात्रि और पवित्र सावन मास के दौरान यहां भक्तों की संख्या काफी बढ़ जाती है। महाशिवरात्रि और सावन मास के हर सोमवार को बाबा का अलग-अलग ढंग से श्रृंगार किया जाता है। इस दौरान मंदिर परिसर में मेले का भी आयोजन होता है। मेले में बच्चों के लिए झूले, खिलौने और अन्य सामान आकर्षण का केंद्र रहते हैं।

सावन में धर्मनाथ धन्नी मंदिर परिसर का मेला और श्रद्धालुओं की भीड़

स्थानीय लोगों के बीच मान्यता है कि मंदिर में सच्चे मन से मांगी गई मन्नत पूरी होती है। इसी आस्था के चलते दूर-दराज से भी श्रद्धालु यहां पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

खोआ का सिंघाड़ा है खास प्रसाद

धर्मनाथ धन्नी मंदिर का प्रसिद्ध खोआ का सिंघाड़ा प्रसाद

धर्मनाथ धन्नी शिव मंदिर का प्रसाद भी अपनी अलग पहचान रखता है। पेड़ा और खोआ-नारियल से बने प्रसाद के अलावा यहां मिलने वाला खोआ का सिंघाड़ा विशेष रूप से प्रसिद्ध है। स्थानीय मान्यता है कि यह प्रसाद भगवान भोलेनाथ को विशेष रूप से प्रिय है। यही वजह है कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के दौरान खोआ का सिंघाड़ा भगवान शिव को जरूर अर्पित करते हैं। इसके बाद इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने के साथ कई श्रद्धालु इसे अपने घर भी ले जाते हैं।

धर्मनाथ धन्नी मंदिर में भगवान शिव को अर्पित किया जाने वाला प्रसाद

खोआ के सिंघाड़े की खासियत इसकी बाहरी पतली खोआ की परत होती है, जिसके अंदर खोआ को बुरादे के रूप में तैयार कर उसमें इलायची और अन्य सामग्री मिलाकर भरा जाता है। बनाने की अलग विधि और स्वाद इसे अन्य मिठाइयों से अलग पहचान देता है। स्थानीय लोगों के अनुसार इस तरह का प्रसाद अन्य जगहों पर आसानी से नहीं मिलता।

शादी-विवाह के लिए भी व्यवस्था

मंदिर परिसर में शादी-विवाह और अन्य धार्मिक आयोजनों के लिए भी व्यवस्था उपलब्ध है। इसके लिए निर्धारित शुल्क लिया जाता है। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ श्रद्धालु यहां पूजा-पाठ और अन्य अनुष्ठान भी कर सकते हैं।

कैसे पहुंचें मंदिर

धर्मनाथ धन्नी मंदिर परिसर में घंटा घर

धर्मनाथ धन्नी शिव मंदिर शहर के दौलतगंज-रतनपुरा मोहल्ले में स्थित है। भगवान बाजार जंक्शन से यहां पैदल भी पहुंचा जा सकता है। इसके अलावा रेलवे स्टेशन से रिक्शा, टोटो या ऑटो के माध्यम से भी मंदिर तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

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सरयू नदी के किनारे स्थित यह प्राचीन मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी अनूठी परंपराओं और स्थानीय पहचान के कारण भी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। सावन के पवित्र महीने में यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के साथ मंदिर परिसर के मेले और यहां मिलने वाले खास प्रसाद का भी आनंद लेते हैं।

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