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Bihar PhD Rules 2026: शोध सहित स्नातक के बाद सीधे मिलेगा PhD में प्रवेश, नए नियम लागू

Bihar PhD Rules 2026: शोध सहित स्नातक (ऑनर्स) के बाद अब सीधे पीएचडी में मिलेगा प्रवेश, बिहार में नई नियमावली लागू

पटना, 08 जुलाई | बिहार के विश्वविद्यालयों में PhD Admission 2026 को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति की मंजूरी के बाद बिहार स्टेट यूनिवर्सिटीज पीएचडी ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशंस, 2026 लागू कर दिया गया है। 

बिहार में नई पीएचडी नियमावली 2026 लागू, शोध सहित स्नातक (ऑनर्स) के बाद 7.5 CGPA वाले छात्रों को सीधे पीएचडी में प्रवेश मिलेगा।

नई नियमावली के तहत अब शोध सहित चार वर्षीय स्नातक (ऑनर्स) करने वाले योग्य छात्र-छात्राएं सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे। यह व्यवस्था 4 जुलाई 2026 से प्रभावी हो चुकी है।

बिहार में पीएचडी प्रवेश के नए नियम क्या हैं?

नई नियमावली के अनुसार जिन छात्रों ने चार वर्षीय शोध सहित स्नातक (ऑनर्स) में 7.5 या उससे अधिक CGPA प्राप्त किया है, वे बिना दो वर्षीय स्नातकोत्तर (PG) किए सीधे पीएचडी में दाखिला ले सकेंगे। शोध आधारित स्नातक पाठ्यक्रम के चौथे वर्ष में ही पीएचडी से संबंधित आवश्यक कोर्स वर्क पूरा कराया जाएगा।

वहीं, 7.5 CGPA से कम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सीधे पीएचडी में प्रवेश नहीं मिलेगा। ऐसे छात्रों को आगे की पात्रता पूरी करने के लिए एक वर्षीय मास्टर डिग्री करनी होगी। इसके बाद ही वे पीएचडी में प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे।

तीन वर्षीय ग्रेजुएशन करने वाले छात्रों के लिए क्या व्यवस्था है?

नई व्यवस्था के तहत तीन वर्षीय स्नातक (Graduation) करने वाले विद्यार्थियों को पीएचडी में प्रवेश के लिए पहले दो वर्षीय स्नातकोत्तर (PG) पूरा करना होगा। इसके बाद ही वे पीएचडी में प्रवेश के पात्र होंगे।

पीएचडी गाइड (शोध-निर्देशक) को लेकर क्या बदले नियम?

नई नियमावली में शोध-निर्देशकों के लिए भी अहम प्रावधान किए गए हैं। जिन शिक्षकों की सेवानिवृत्ति में तीन वर्ष से कम समय बचा होगा, वे नए पीएचडी शोधार्थियों का मार्गदर्शन नहीं कर सकेंगे। हालांकि, पहले से पंजीकृत शोधार्थियों का मार्गदर्शन वे अपनी सेवानिवृत्ति तक जारी रख सकेंगे।

इसके अलावा, पीएचडी शोध प्रबंध (थीसिस) का मूल्यांकन दो बाहरी परीक्षकों (External Examiners) और शोध-निर्देशक की सहभागिता से किया जाएगा, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनेगी।

2017 की पीएचडी नियमावली खत्म, 2026 के नए नियम लागू

नई पीएचडी नियमावली लागू होने के साथ ही वर्ष 2017 की पुरानी पीएचडी नियमावली समाप्त कर दी गई है। राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद उनके अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह के हस्ताक्षर से ऑर्डिनेंस एंड रेगुलेशंस जारी किए गए हैं। अब बिहार के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में पीएचडी की पढ़ाई और प्रवेश प्रक्रिया इसी नई व्यवस्था के अनुसार संचालित होगी।

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पीएचडी में प्रवेश के लिए न्यूनतम योग्यता क्या है?

नई पीएचडी विनियमावली को यूजीसी (UGC) 2022 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप तैयार किया गया है। पीएचडी में प्रवेश के लिए सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए कम से कम 55 प्रतिशत अंक अनिवार्य होंगे, जबकि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को यूजीसी के नियमानुसार अंकों में छूट और अन्य प्रावधानों का लाभ मिलेगा।

एक नजर में नए नियम

7.5 या उससे अधिक CGPA वाले शोध सहित स्नातक (ऑनर्स) छात्र सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकेंगे।

वर्ष 2017 की पुरानी पीएचडी नियमावली समाप्त कर दी गई है।

नई नियमावली यूजीसी 2022 के मानकों के अनुरूप तैयार की गई है। 

नए नियम 4 जुलाई 2026 से पूरे बिहार में लागू हो गए हैं।

सामान्य वर्ग के लिए 55% न्यूनतम अंक आवश्यक होंगे।

सेवानिवृत्ति में तीन वर्ष से कम समय बचे शिक्षकों को नए शोधार्थी आवंटित नहीं किए जाएंगे। 

Bihar PhD Rules 2026 के महत्वपूर्ण बिन्दू

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