क्या भूतों ने बनवाया था ककनमठ मंदिर? जानें 1000 साल पुराने शिव मंदिर का इतिहास, रहस्य और सच्चाई
विशेष लेख | संपादक
भारत में कई ऐसे प्राचीन मंदिर हैं, जिनसे जुड़ी कहानियां आज भी लोगों को हैरान कर देती हैं। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सिहोनिया गांव में स्थित ककनमठ मंदिर भी उन्हीं में से एक है। करीब एक हजार साल पुराना यह शिव मंदिर अपनी अनोखी वास्तुकला के साथ-साथ उस लोककथा के लिए भी प्रसिद्ध है, जिसमें दावा किया जाता है कि इसका निर्माण एक ही रात में भूतों ने किया था। हालांकि, इतिहास इस कहानी से अलग तस्वीर पेश करता है।
क्या कहता है इतिहास?
इतिहासकारों के अनुसार, ककनमठ मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में कच्छपघात वंश के राजा कीर्तिराज ने कराया था। माना जाता है कि उन्होंने अपनी रानी ककनावती की भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था से प्रभावित होकर इस भव्य मंदिर का निर्माण करवाया। कहा जाता है कि रानी के नाम पर ही इस मंदिर का नाम ककनमठ पड़ा।
भूतों वाली कहानी कहां से आई?
स्थानीय लोगों के बीच एक प्रसिद्ध लोककथा प्रचलित है कि इस मंदिर को इंसानों ने नहीं, बल्कि भूतों ने एक ही रात में बनाया था। मान्यता है कि जैसे ही सुबह होने लगी और सूरज की पहली किरण निकली, निर्माण कार्य अधूरा छोड़कर वे गायब हो गए। मंदिर परिसर में बिखरे पत्थरों और आसपास के खंडहरों को लोग इसी कथा से जोड़कर देखते हैं।
बिना सीमेंट और गारे के बना मंदिर
करीब 115 फीट ऊंचा ककनमठ मंदिर अपनी निर्माण शैली के कारण भी चर्चा में रहता है। इसके विशाल पत्थरों को जोड़ने के लिए चूना, सीमेंट या गारे का इस्तेमाल नहीं किया गया। पत्थरों को इस तरह संतुलित ढंग से रखा गया है कि सदियों से यह मंदिर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करते हुए आज भी खड़ा है। यही इसकी सबसे बड़ी स्थापत्य विशेषता मानी जाती है।
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आसपास मौजूद हैं कई ऐतिहासिक धरोहरें
ककनमठ मंदिर के आसपास बटेश्वर मंदिर समूह और चौंसठ योगिनी मंदिर जैसी प्राचीन धरोहरें भी स्थित हैं। इतिहासकारों का मानना है कि समय के साथ हुए आक्रमणों और प्राकृतिक कारणों से इन मंदिरों के कई हिस्से क्षतिग्रस्त हुए, लेकिन आज भी ये भारत की समृद्ध स्थापत्य कला और सांस्कृतिक विरासत की गवाही देते हैं।
कैसे पहुंचें?
ककनमठ मंदिर मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सिहोनिया गांव में स्थित है। यह मुरैना शहर से करीब 35 किलोमीटर और ग्वालियर से लगभग 70 किलोमीटर दूर है। सड़क मार्ग से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है। इतिहास, प्राचीन वास्तुकला और रहस्यमयी स्थानों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए यह मंदिर खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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