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सारण के किसानों को मिलेगी आधुनिक खेती की ट्रेनिंग

सारण के किसानों को आधुनिक खेती की ट्रेनिंग के लिए दूसरे राज्यों में भेजा जाएगा, डीएम ने दिए निर्देश

सारण में आत्मा शासी परिषद की बैठक में जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव

छपरा, 08 अगस्त | सारण के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक और नवाचारी कृषि तकनीकों से जोड़ने की तैयारी शुरू हो गई है। किसानों को मशरूम, स्कैम्पी, पुष्प उत्पादन और गव्य आधारित उत्पादों जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिलाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए अलग-अलग राज्यों के उत्कृष्ट संस्थानों को चिन्हित किया जाएगा।

शुक्रवार को समाहरणालय सभाकक्ष में जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में आत्मा (कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरण) की शासी परिषद की बैठक हुई। इसमें कृषि योजनाओं, किसानों के प्रशिक्षण और कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों को बढ़ावा देने को लेकर चर्चा की गई।

प्रशिक्षण के बाद किसानों को कितना लाभ मिला, होगा आकलन 

बैठक में जिलाधिकारी ने आत्मा के माध्यम से कराए जाने वाले प्रशिक्षण और किसान परिभ्रमण कार्यक्रमों का केवल आयोजन करने के बजाय उनके परिणामों का आकलन करने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रशिक्षण के बाद यह देखा जाए कि किसानों ने सीखी गई तकनीकों को कितना अपनाया और इससे उनके कृषि उत्पादन तथा आय में क्या बदलाव आया।

इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आउटकम असेसमेंट कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है।

चार राज्यों में अलग-अलग कृषि गतिविधियों की ट्रेनिंग

सारण में कृषि योजनाओं की समीक्षा बैठक में अधिकारी

विशिष्ट कृषि गतिविधियों के लिए किसानों को दूसरे राज्यों के बेहतर संस्थानों में प्रशिक्षण दिलाने की योजना है। बैठक में निम्न गतिविधियों के लिए संस्थानों को चिन्हित करने का निर्देश दिया गयअ-

  • मशरूम उत्पादन - हिमाचल प्रदेश
  • स्कैम्पी उत्पादन - ओडिशा
  • पुष्प उत्पादन- पश्चिम बंगाल
  • गव्य आधारित उत्पाद - हरियाणा

इसके अलावा हाइड्रोपोनिक्स, मोती उत्पादन और अलंकारी मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की बात कही गई।

प्रगतिशील किसानों के खेतों पर होंगे डेमोंस्ट्रेशन

नई तकनीकों को ज्यादा किसानों तक पहुंचाने के लिए नवाचारी खेती करने वाले प्रगतिशील किसानों के खेतों पर प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। दूसरे किसानों को इन गतिविधियों से परिचित कराने के लिए किसान प्रेरणा कार्यक्रम और अनुभव साझा करने वाले आयोजन भी किए जाएंगे।

इसका उद्देश्य यह है कि किसान केवल प्रशिक्षण लेकर वापस न लौटें, बल्कि सफल किसानों के खेतों पर तकनीक को देखकर उसे अपने स्तर पर अपनाने के लिए भी प्रेरित हों।

एग्री-स्टैक की प्रगति पर भी मांगी रिपोर्ट

बैठक में एग्री-स्टैक के क्रियान्वयन की प्रगति पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने जिले में अब तक हुए काम, कृषि क्षेत्र में किए गए नवाचार, उपलब्धियों और सामने आ रही चुनौतियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया।

किसानों के लिए क्या बदलेगा?

बैठक में लिए गए फैसलों का उद्देश्य किसानों को केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित रखने के बजाय अधिक आय की संभावना वाली कृषि और संबद्ध गतिविधियों से जोड़ना है। मशरूम, फूल, स्कैम्पी, हाइड्रोपोनिक्स और मोती उत्पादन जैसी गतिविधियां किसानों के लिए अतिरिक्त आय के विकल्प बन सकती हैं।

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हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक लाभ प्रशिक्षण के बाद किसानों द्वारा तकनीक अपनाने के साथ-साथ बाजार, संसाधन और आवश्यक तकनीकी सहायता उपलब्ध होने पर निर्भर करेगा।

जिलाधिकारी ने कृषि योजनाओं के समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन के साथ किसानों को फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और कृषि यंत्रीकरण के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया। 

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