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छपरा में 1972 से गणिनाथ-गोविन्द पूजा की परंपरा, भव्य मंदिर

 गणिनाथ गोविन्द पूजा | धर्म 

छपरा में 1972 से चली आ रही गणिनाथ-गोविन्द पूजा की परंपरा, अब भव्य मंदिर में होती है आराधना

गणिनाथ गोविन्द बाबा और खेमासती की प्रतिमाएं

छपरा (सारण) | करीब पांच दशक पहले शुरू हुई गणिनाथ-गोविन्द जी की पूजा की परंपरा आज छपरा में एक भव्य मंदिर के रूप में अपना स्थायी स्वरूप ले चुकी है। वर्ष 1972 में गांधी चौक से शुरू हुई यह पूजा अब शहर के मीठा बाजार स्थित मंदिर में आयोजित होती है। इस वर्ष गणिनाथ-गोविन्द जी की पूजा 5 सितंबर को होगी।

जन्माष्टमी के बाद आने वाले शनिवार को देशभर में गणिनाथ जी और उनके पुत्र गोविन्द जी की पूजा श्रद्धा के साथ किए जाने की परंपरा है। मान्यता के अनुसार, यदि जन्माष्टमी शनिवार को पड़ती है तो पूजा उसी दिन की जाती है।

गणिनाथ जी को लेकर समाज में कई लोकमान्यताएं प्रचलित हैं। मान्यता है कि मुगल काल में आक्रांताओं के कारण जब आम लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था, तब गणिनाथ जी ने लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने और उनकी रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कहा जाता है कि उन्होंने जाति-वर्ग का भेद किए बिना लोगों की मदद की और आक्रांताओं से उनकी रक्षा की।

गणिनाथ गोविन्द पूजा के दौरान नगर परिक्रमा

गणिनाथ जी के जन्म से संबंधित विस्तृत ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने की बात कही जाती है। लोकमान्यता के अनुसार, उनका जन्म महनार क्षेत्र के पल्लवईया धाम में हुआ था। यह स्थल आज धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र के साथ पर्यटन स्थल के रूप में भी पहचान बना चुका है। बताया जाता है कि उनका लालन-पालन वैश्य समाज के कानू/हलवाई समुदाय द्वारा किया गया। इसी कारण इस समाज में गणिनाथ जी के प्रति विशेष श्रद्धा देखने को मिलती है। हालांकि पल्लवईया धाम में सभी जाति-वर्ग के लोग उनकी पूजा-अर्चना करते हैं।

1972 में हुई थी छपरा में पूजा की शुरुआत

छपरा में गणिनाथ-गोविन्द जी की पूजा की शुरुआत वर्ष 1972 में स्व. दुर्गा प्रसाद गुप्त ने शंकर बिस्कुट फैक्ट्री गांधी चौक में अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर की थी। उस समय मद्धेशिया कान्य- कुब्ज हलवाई वैश्य सभा के बैनर तले पूजा का आयोजन शुरू हुआ। इसके बाद वर्ष 1986 में उनके पुत्र ओमप्रकाश गुप्त, जो उस समय मद्धेशिया कान्य- कुब्ज हलवाई वैश्य सभा के सचिव भी थे, ने छपरा नगरपालिका परिसर में बड़े स्तर पर पूजा का आयोजन कराया। इसके पहले पूजा का आयोजन अलग- अलग धर्मशालाओं में होता रहा था।

2004 में मंदिर के लिए खरीदी गई जमीन

इसके बाद अलग-अलग स्थानों पर हर वर्ष गणिनाथ-गोविन्द जी की पूजा का आयोजन होता रहा। वर्ष 2004 में शहर के मीठा बाजार में मंदिर निर्माण के उद्देश्य से जमीन खरीदी गई। लंबे प्रयास के बाद वर्ष 2025 में इसी जमीन पर भव्य मंदिर का निर्माण पूरा हुआ।

2025 में हुई प्राण-प्रतिष्ठा और मूर्ति स्थापना

गणिनाथ गोविन्द पूजा में शामिल श्रद्धालु और भक्त

भव्य मंदिर के निर्माण के बाद वर्ष 2025 में तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नगर भ्रमण और प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद गणिनाथ-गोविन्द जी की प्रतिमाओं को मंदिर में विधिवत स्थापित किया गया। मंदिर में गणिनाथ-गोविन्द जी के साथ खेमासती और भगवान हनुमान जी की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं।

यह भी पढ़ें: छपरा का धर्मनाथ धन्नी शिव मंदिर: अर्द्धनागेश्वर शिवलिंग और खास प्रसाद

छोटी शुरुआत से भव्य मंदिर तक का सफर

गांधी चौक में वर्ष 1972 में शुरू हुई पूजा की परंपरा ने करीब पांच दशक में लंबा सफर तय किया है। कभी सीमित स्तर पर शुरू हुआ यह आयोजन अब स्थायी मंदिर तक पहुंच चुका है। इससे छपरा में गणिनाथ-गोविन्द जी की पूजा को एक स्थायी धार्मिक केंद्र मिला है।

5 सितंबर को फिर जुटेंगे श्रद्धालु

गणिनाथ गोविन्द पूजा 2026 के आयोजन का पोस्टर

इस वर्ष गणिनाथ-गोविन्द जी की पूजा 5 सितंबर को होगी। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।



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2 टिप्पणियाँ

  1. Ismein 1972 1986 2004 2025 2026 ka itihaas darj hai ISI ko Sahi Mankar chalna hoga?

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    1. छपरा में पूजा के इतिहास के बारे में बताया गया है सबसे पहले,, उसके बाद जमीन की खरीद व मंदिर निर्माण के बारे में जानकारी दी गयी है. लेकिन पूजा छपरा में 1972 से लगातार शहर में किसी न किसी जगह होती रही...

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