सारण में सब्जी किसानों के लिए बनेगा मार्केट यार्ड, कोल्ड स्टोरेज और प्याज भंडारण केंद्र
छपरा, 08 अगस्त | सारण जिले में सब्जी किसानों को बेहतर बाजार और भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसको लेकर जिले के 20 प्रखंडों में बने प्राइमरी वेज कोऑपरेटिव सोसाइटी (PVCs) के स्तर पर मार्केट यार्ड, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज और प्याज भंडारण केंद्र विकसित किए जाएंगे। साथ ही किसानों को संगठित बाजार से जोड़ने के लिए ‘तरकारी आउटलेट’ भी संचालित किए जाएंगे।
इन योजनाओं की प्रगति को लेकर 6 अगस्त को समाहरणालय में जिला पदाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में वेजफेड के तहत संचालित योजनाओं और सब्जी उत्पादक किसानों को इनसे जोड़ने की स्थिति की समीक्षा की गई।
20 प्रखंडों में PVCs, 40,388 किसान जुड़े
सारण के सभी 20 प्रखंडों में एक-एक प्राइमरी वेज कोऑपरेटिव सोसाइटी (PVCs) का गठन किया गया है। सदस्यता अभियान के तहत अब तक 40,388 सब्जी उत्पादक किसान PVCs से जुड़े हैं।
प्रत्येक PVCs को जरूरी आधारभूत उपकरणों की खरीद के लिए 98,800 रुपये की राशि उपलब्ध कराई जाती है। अब तक 10 प्रखंडों की PVCs को यह राशि दी जा चुकी है।
जिलाधिकारी ने जिले के सभी पंजीकृत सब्जी उत्पादक किसानों को PVCs से जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है।
10,000 वर्गफुट में विकसित होगा आधारभूत ढांचा
प्रत्येक PVCs के लिए करीब 10,000 वर्गफुट भूमि पर आधारभूत संरचना विकसित करने की योजना है। इसकी एक इकाई की अनुमानित लागत 1.14 करोड़ रुपये होगी।
प्रस्तावित परिसर में मार्केट यार्ड, ‘अपना मंडी’ प्लेटफॉर्म, सब्जियों की धुलाई, सफाई, छंटाई और ग्रेडिंग के लिए शेड, कार्यालय, गार्ड रूम, शौचालय, आंतरिक सड़क और पार्किंग जैसी सुविधाएं होंगी।
इसके साथ ही 20 मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम और 10 मीट्रिक टन क्षमता का शीत भंडारण गृह बनाया जाएगा। पानी की व्यवस्था के लिए ट्यूबवेल भी प्रस्तावित है।
जिलाधिकारी ने सभी अंचलाधिकारियों को आवश्यकतानुसार उपयुक्त भूमि का शीघ्र चिन्हीकरण करने का निर्देश दिया, ताकि निर्माण कार्य समय पर शुरू कराया जा सके।
हर PVCs में 50 मीट्रिक टन का प्याज भंडारण
सब्जी किसानों को प्याज के सुरक्षित और वैज्ञानिक भंडारण की सुविधा देने के लिए प्रत्येक PVCs में 50 मीट्रिक टन क्षमता का प्याज भंडारण ढांचा बनाने की योजना है।
इसके लिए करीब 1,500 वर्गफुट भूमि की आवश्यकता होगी। प्रति इकाई इसकी अनुमानित लागत 13.05 लाख रुपये निर्धारित की गई है।
‘तरकारी आउटलेट’ से सीधे बिकेंगी किसानों की सब्जियां
वेजफेड और PVCs के माध्यम से ‘तरकारी आउटलेट’ योजना भी संचालित की जा रही है। इसके तहत किसानों से सीधे ताजी सब्जियों की खरीद कर संगठित खुदरा बिक्री की व्यवस्था की जाएगी।
प्रत्येक तरकारी आउटलेट के लिए 7.44 लाख रुपये की लागत स्वीकृत है। योजना का उद्देश्य किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के साथ उपभोक्ताओं को ताजी और गुणवत्तापूर्ण सब्जियां उचित दर पर उपलब्ध कराना है।
किसानों को क्या फायदा होगा?
मार्केट यार्ड, ग्रेडिंग, गोदाम और शीत भंडारण जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से किसानों को उपज के रख-रखाव और बिक्री के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर विकल्प मिल सकते हैं। प्याज भंडारण की सुविधा से भी किसानों को फसल के तुरंत बाद कम कीमत पर बिक्री करने की मजबूरी कम करने में मदद मिल सकती है।
वहीं, ‘तरकारी आउटलेट’ के जरिए सीधे बिक्री की व्यवस्था किसानों और बाजार के बीच की कड़ी को मजबूत कर सकती है। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक लाभ सुविधाओं के समय पर निर्माण, उनके नियमित संचालन और किसानों की भागीदारी पर निर्भर करेगा।
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जिला पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को योजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा पात्र किसानों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का निर्देश दिया है। क्षेत्रीय स्तर पर नियमित निगरानी और समस्याओं के त्वरित समाधान पर भी जोर दिया गया।
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