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सारण में 14.54 लाख लोगों की टीबी स्क्रीनिंग, 2434 मरीज मिले

घर-घर पहुंची टीबी जांच टीम, सारण में 2434 नए मरीजों की पहचान

हेल्थ | छपरा | टीबी

सारण के गांव में स्वास्थ्य टीम द्वारा टीबी स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान

छपरा, 13 अगस्त | टीबी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में स्वास्थ्य विभाग की टीमें अब अस्पतालों के साथ-साथ गांवों और घरों तक पहुंच रही हैं। सारण जिले में 24 मार्च से 12 अगस्त 2026 तक चलाए गए विशेष स्क्रीनिंग अभियान में 14,54,504 लोगों की जांच की गई। इस दौरान 2434 नए टीबी मरीजों की पहचान हुई है।

अभियान के दौरान टीबी के संभावित मरीजों की पहचान के बाद उनकी पुष्टि के लिए एक्स-रे और नैट (NAAT) जांच कराई गई। जिले में 44,737 लोगों का एक्स-रे और 13,202 लोगों की नैट जांच की गई।

हाई रिस्क गांवों में लगाए गए जांच कैंप

सारण में टीबी स्क्रीनिंग अभियान के दौरान ग्रामीणों की जांच

टीबी की अधिक आशंका वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने विशेष कैंप लगाए। गांवों में घर-घर पहुंचकर लोगों की स्क्रीनिंग की गई। हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर भी टीबी की जांच की गई। इससे उन लोगों तक जांच की सुविधा पहुंची, जो किसी कारण से अस्पताल नहीं पहुंच पाते हैं।

जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. रत्नेश्वर प्रसाद ने बताया कि स्क्रीनिंग के दौरान संदिग्ध पाए गए लोगों को आगे की जांच के लिए भेजा गया। जांच में टीबी की पुष्टि होने के बाद मरीजों को उपचार से जोड़ने की प्रक्रिया की जा रही है।

अस्पतालों की ओपीडी में भी हो रही जांच

अभियान के तहत जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, रेफरल अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी की ओपीडी में आने वाले मरीजों की भी टीबी के लक्षणों के आधार पर जांच की जा रही है। लंबे समय तक खांसी, वजन कम होना, लगातार बुखार और रात में पसीना आने जैसे लक्षणों वाले लोगों को जांच कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

जेल और बाल सुधार गृह तक पहुंची टीम

टीबी स्क्रीनिंग अभियान को ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखा गया। मंडल कारा और बाल सुधार गृह में भी विशेष कैंप लगाकर लोगों की जांच की गई। एक साथ अधिक लोगों के रहने वाले इन स्थानों पर संक्रमण के जोखिम को देखते हुए स्क्रीनिंग को महत्वपूर्ण माना गया।

समय पर पहचान पर जोर

सारण में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा टीबी स्क्रीनिंग

डीपीसी-टीबी हिमांशु शेखर ने बताया कि टीबी के खिलाफ लड़ाई में मरीज की समय पर पहचान और उपचार शुरू करना महत्वपूर्ण है। बीमारी की देर से पहचान होने पर संक्रमण परिवार और समुदाय के दूसरे लोगों तक पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है।

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सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि टीबी की पहचान शुरुआती चरण में होने पर उपचार समय पर शुरू किया जा सकता है। 100 दिवसीय विशेष अभियान के तहत जिले में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग की गई है और हाई रिस्क गांवों के साथ अस्पतालों, जेल तथा बाल सुधार गृह में भी जांच कराई गई।

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स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्क्रीनिंग के साथ लोगों को टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। विभाग का जोर अब चिन्हित मरीजों को नियमित उपचार से जोड़ने और उनके संपर्क में आने वाले लोगों की भी जांच सुनिश्चित करने पर है।

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