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राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा तोड़े जाने पर छपरा में रोष, वीरेन्द्र नारायण यादव की अध्यक्षता में बैठक

राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा तोड़े जाने पर छपरा में रोष, दोषियों की गिरफ्तारी व कड़ी सजा की मांग

"राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा तोड़े जाने पर छपरा में आयोजित बैठक में विधान परिषद सदस्य प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र नारायण यादव

छपरा, 19 जुलाई | पश्चिम बंगाल के वर्धमान जिले के रानीगंज कोयलरी क्षेत्र में महापंडित राहुल सांकृत्यायन की 9 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा को असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त किए जाने के विरोध में रविवार को छपरा में एक बैठक आयोजित की गई। बिहार विधान परिषद सदस्य प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र नारायण यादव की अध्यक्षता में हुई बैठक में घटना की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी तथा कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की गई।

बैठक में बताया गया कि 15 जुलाई की रात असामाजिक तत्वों ने राहुल सांकृत्यायन की प्रतिमा को तोड़कर गायब कर दिया था, जिससे साहित्य एवं समाज के विभिन्न वर्गों में आक्रोश है।

सारण जिले से रहा गहरा और ऐतिहासिक संबंध

बैठक को संबोधित करते हुए प्रो. (डॉ.) वीरेन्द्र नारायण यादव ने कहा कि महापंडित राहुल सांकृत्यायन का सारण जिले से गहरा और ऐतिहासिक संबंध रहा है। उन्होंने सारण को अपनी वास्तविक कर्मभूमि बनाया और किसानों, मजदूरों तथा आम लोगों के बीच रहकर सामाजिक चेतना जगाने का कार्य किया। 

स्वतंत्रता आंदोलन में निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

उन्होंने कहा कि राहुल सांकृत्यायन स्वतंत्रता आंदोलन के सक्रिय सेनानी थे। वर्ष 1921 के असहयोग आंदोलन में सत्याग्रह करते हुए उन्हें गिरफ्तार किया गया था। वहीं 1939 के अमवारी किसान आंदोलन में किसान जमीदारी के खिलाफ संघर्ष के दौरान वे लाठीचार्ज के शिकार हुए और जेल भी गए, जिसकी चर्चा देशभर के समाचार पत्रों में हुई।

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साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी रहा महत्वपूर्ण योगदान

उन्होंने कहा कि राहुल सांकृत्यायन केवल साहित्यकार ही नहीं, बल्कि हिंदी और भोजपुरी के प्रख्यात विद्वान, चिंतक, इतिहासकार, भाषाविद् और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने राजेंद्र कॉलेज, छपरा के शासी निकाय के शिक्षाविद् के रूप में हिंदी और भोजपुरी के प्रख्यात विद्वान प्राचार्य की नियुक्ति में महत्वपूर्ण योगदान दिया तथा छपरा और सारण पर कई महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखीं। उनकी प्रमुख कृतियों में 'मेरे असहयोग के साथी', 'मैं जिनका कृतज्ञ', 'मेरी जीवनयात्रा' और 'साम्यवाद ही क्यों' शामिल हैं। उनकी प्रसिद्ध कृति 'मध्य एशिया का इतिहास' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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बैठक में वक्ताओं ने कहा कि महापंडित राहुल सांकृत्यायन जैसी महान विभूति की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। राज्य सरकार से दोषियों की पहचान कर उनके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई।

बैठक में प्रो. (डॉ.) लालबाबू यादव, डॉ. श्यामशरण, डॉ. नागेंद्र राय, विश्वनाथ राय, डॉ. अनिल कुमार, विकास कुमार, मिन्टू कुमार, प्रो. कामेश्वर सिंह, प्रो. उदय शंकर ओझा, प्रो. जयराम सिंह, प्रो. अखिलेश कुमार सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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