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सरकारी वकीलों की नियुक्ति पर घमासान, वरिष्ठ अधिवक्ता ने स्टैंडिंग काउंसिल पद ठुकराया
पटना हाईकोर्ट में बिहार सरकार की ओर से गठित सरकारी अधिवक्ताओं के नए पैनल को लेकर अधिवक्ता समुदाय में चर्चा तेज हो गई है। पैनल में वरिष्ठता, विधिक अनुभव और पेशेवर योग्यता को पर्याप्त महत्व नहीं दिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसी बीच वरिष्ठ अधिवक्ता अवधेश कुमार पाण्डेय ने स्टैंडिंग काउंसिल (SC) के पद पर ज्वाइन करने से इनकार कर दिया है।
अवधेश कुमार पाण्डेय ने इस संबंध में महाधिवक्ता को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह स्टैंडिंग काउंसिल के पद पर ज्वाइन नहीं करेंगे। उनके अनुसार, उन्होंने एडिशनल एडवोकेट जनरल के पद के लिए अपनी सहमति दी थी, जबकि उन्हें स्टैंडिंग काउंसिल नियुक्त किया गया।
करीब आठ वर्ष तक राजकीय अधिवक्ता रहे हैं पाण्डेय
अवधेश कुमार पाण्डेय के अनुसार, वह करीब 15 वर्ष पहले बिहार सरकार के राजकीय अधिवक्ता के रूप में पटना हाईकोर्ट में लगभग आठ वर्षों तक सेवा दे चुके हैं। इसके अलावा वह लंबे समय से हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
उनके स्टैंडिंग काउंसिल पद पर ज्वाइन नहीं करने के फैसले के बाद सरकारी अधिवक्ताओं के नए पैनल में पदों और जिम्मेदारियों के निर्धारण को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।
वरिष्ठता और योग्यता को लेकर उठे सवाल
अधिवक्ताओं के एक वर्ग का कहना है कि सरकार के महत्वपूर्ण मामलों की पैरवी के लिए गठित पैनल में वरिष्ठता, अनुभव, विधिक दक्षता और हाईकोर्ट में स्वतंत्र रूप से बहस करने की क्षमता को प्रमुख आधार बनाया जाना चाहिए।
कुछ अधिवक्ताओं की ओर से यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि लंबे समय से हाईकोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे अनुभवी अधिवक्ताओं को अपेक्षित जिम्मेदारी मिली या नहीं। हालांकि, पैनल के चयन में किसी प्रकार की अनियमितता या पक्षपात के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व की भी चर्चा
सरकारी अधिवक्ताओं के पैनल को लेकर सामाजिक और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व का मुद्दा भी चर्चा में है। अधिवक्ताओं के एक वर्ग का कहना है कि चयन प्रक्रिया में योग्यता और वरिष्ठता को प्राथमिक आधार बनाए रखने के साथ विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों का संतुलन भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
पाण्डेय की असहमति के बाद बढ़ी चर्चा
अवधेश कुमार पाण्डेय की ओर से स्टैंडिंग काउंसिल पद पर ज्वाइन करने से इनकार किए जाने के बाद पूरे मामले ने अधिवक्ता समुदाय में नई बहस छेड़ दी है। अब नजर इस बात पर है कि बिहार सरकार और महाधिवक्ता कार्यालय इस मामले पर क्या रुख अपनाते हैं।
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फिलहाल, पैनल को लेकर उठाए जा रहे सवालों और वरिष्ठ अधिवक्ता की ओर से SC पद पर ज्वाइन नहीं करने के फैसले ने सरकारी अधिवक्ताओं की नियुक्ति को चर्चा का विषय बना दिया है।

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