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सदर अस्पताल में बढ़ी प्रसव सुविधाएं, 3 माह में 286 सिजेरियन

 स्वास्थ्य | अस्पताल 

सदर अस्पताल में बढ़ी प्रसव सुविधाएं, तीन माह में 286 महिलाओं का सिजेरियन

छपरा सदर अस्पताल का मुख्य भवन

छपरा, 20 अगस्त | सदर अस्पताल में प्रसव और मातृ स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाओं के विस्तार का असर संस्थागत प्रसव के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। मई से जुलाई के बीच तीन माह में 1321 महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराया गया, जबकि 286 महिलाओं को सिजेरियन प्रसव की सुविधा मिली। इस दौरान 92 जटिल प्रसव के मामलों का अस्पताल में ही बेहतर प्रबंधन कर सुरक्षित प्रसव कराया गया।

सरकारी अस्पताल में पात्र लाभार्थियों को प्रसव संबंधी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को निजी अस्पतालों में होने वाले खर्च से राहत मिलती है। चिकित्सकों, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बढ़ने से जटिल मामलों में भी समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

जुलाई में सबसे अधिक 549 संस्थागत प्रसव

मई में सदर अस्पताल में 384 महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराया गया था। जून में यह संख्या बढ़कर 388 और जुलाई में 549 हो गई। इस तरह मई की तुलना में जुलाई में 165 अधिक महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराया गया।

सिजेरियन प्रसव के मामलों में भी लगातार वृद्धि हुई। मई में 70, जून में 90 और जुलाई में 126 महिलाओं का सिजेरियन प्रसव कराया गया। तीन माह में कुल 286 महिलाओं को सिजेरियन की सुविधा मिली।

3681 गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व जांच के लिए रजिस्ट्रेशन

सदर अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच पर भी जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 3681 गर्भवती महिलाओं का प्रसव पूर्व जांच के लिए रजिस्ट्रेशन किया गया, जबकि 1955 महिलाओं को चार प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) की सुविधा मिली।

नियमित प्रसव पूर्व जांच से हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान समय रहते करने में मदद मिलती है। अस्पताल में सुरक्षित गर्भपात की सुविधा के साथ प्रसव के 48 घंटे के भीतर 256 महिलाओं को पोस्टपार्टम आईयूसीडी भी लगाया गया।

जटिल प्रसव के बेहतर प्रबंधन से रेफरल में कमी

प्रसव के दौरान जटिल स्थिति उत्पन्न होने पर महिलाओं को कई बार उच्च चिकित्सा केंद्रों के लिए रेफर करना पड़ता है। सदर अस्पताल में जटिल प्रसव के प्रबंधन की क्षमता मजबूत किए जाने से ऐसे मामलों में कमी लाने का प्रयास किया जा रहा है।

मई से जुलाई के बीच 92 जटिल प्रसव वाली महिलाओं का अस्पताल में ही विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशिक्षित नर्सिंग टीम की निगरानी में प्रबंधन किया गया। इससे मरीजों और उनके परिजनों को दूसरे अस्पतालों की दौड़ लगाने से राहत मिली और समय पर उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिली।

तीन सरकारी अस्पतालों में सिजेरियन की सुविधा

सदर अस्पताल के काउंटर पर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए कतार में खड़े लोग

सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार चौधरी ने बताया कि सदर अस्पताल के अलावा दरियापुर सीएचसी और सोनपुर अनुमंडलीय अस्पताल में भी सिजेरियन प्रसव की सुविधा उपलब्ध है। इसका उद्देश्य प्रखंड और अनुमंडल स्तर पर ही जरूरतमंद गर्भवती महिलाओं को आवश्यक प्रसूति सेवाएं उपलब्ध कराना है, ताकि गंभीर स्थिति में मरीजों को अनावश्यक रूप से दूर नहीं जाना पड़े।

उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सुविधाओं के विस्तार से लोगों का भरोसा बढ़ रहा है। प्रसव और सिजेरियन जैसी सेवाएं सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को विशेष लाभ मिल रहा है।

गर्भाशय कैंसर की जांच के लिए कोलपोस्कोपी

सदर अस्पताल में महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी अन्य सेवाओं को भी मजबूत किया गया है। यहां गर्भाशय के मुंह (सर्विक्स) में कैंसर की आशंका की जांच के लिए कोलपोस्कोपी की सुविधा उपलब्ध है। इससे संदिग्ध मामलों की समय रहते पहचान कर आगे की जांच और उपचार के लिए आवश्यक कदम उठाने में मदद मिल सकती है।

एनीमिया से जूझ रही गर्भवती महिलाओं को एफसीएम थेरेपी

गर्भवती महिलाओं में एनीमिया की स्थिति को देखते हुए सदर अस्पताल में एफसीएम (Ferric Carboxymaltose) थेरेपी की सुविधा भी उपलब्ध है। जिन महिलाओं में आयरन की कमी अधिक होती है और सामान्य आयरन की दवाओं से अपेक्षित सुधार नहीं होता, उन्हें चिकित्सकीय परामर्श के आधार पर यह थेरेपी दी जाती है।

इससे शरीर में आयरन की कमी को तेजी से पूरा करने में मदद मिलती है और गर्भावस्था के दौरान होने वाली जटिलताओं के जोखिम को कम करने में सहायता मिलती है।

लाभार्थी ने कहा- निजी अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ी

सदर अस्पताल में प्रसव कराने वाली रतनपुरा मोहल्ला निवासी साधना देवी ने बताया कि प्रसव के दौरान डॉक्टरों और नर्सों ने लगातार निगरानी रखी। उन्होंने कहा कि प्रसव के समय परेशानी होने पर डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू किया और दूसरे अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ी। सरकारी अस्पताल में इलाज मिलने से परिवार पर खर्च का बोझ भी नहीं पड़ा।

रेफरल व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर

जिला स्वास्थ्य समिति के डीपीएम अरविंद कुमार ने बताया कि सदर अस्पताल में रेफरल सेवाओं को मजबूत करने के साथ जटिल प्रसव के मामलों के बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसका असर संस्थागत प्रसव के आंकड़ों में दिखाई दे रहा है। गर्भवती महिलाओं को समय पर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों की क्षमता लगातार बढ़ाई जा रही है।

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अस्पताल प्रबंधक राजेश्वर प्रसाद ने बताया कि संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों को सरकारी अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य है कि हर गर्भवती महिला को समय पर सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ प्रसव की सुविधा मिले।

सरकारी अस्पताल में प्रसव, सिजेरियन, जटिल प्रसव के प्रबंधन और प्रसव पूर्व जांच जैसी सेवाओं की उपलब्धता से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को आर्थिक राहत मिल रही है। साथ ही सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।

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