Advertisement

सारण शिक्षक सीट पर जदयू-राजद का अनोखा सियासी समीकरण

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र: एक ही परिवार में जदयू-राजद की अनूठी सियासी बिसात

संगीता चौधरी और प्रो. जयराम यादव का सियासी समीकरण

छपरा, 13 सितम्बर | सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में इस बार एक अनोखा राजनीतिक समीकरण सामने आया है। एक ही परिवार के सदस्य अलग-अलग राजनीतिक दलों के साथ चुनावी मैदान में नजर आएंगे। जदयू की सक्रिय नेत्री और सिवान जिला परिषद अध्यक्ष संगीता चौधरी के पति प्रो. जयराम यादव को राष्ट्रीय जनता दल ने पार्टी में शामिल कर सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

पति-पत्नी की अलग पार्टियाँ

संगीता चौधरी और प्रो. जयराम यादव

संगीता चौधरी जदयू में सक्रिय हैं, जबकि उनके पति प्रो. जयराम यादव अब राजद के साथ राजनीतिक पारी शुरू कर रहे हैं। राजद ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाने के बाद इसी शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से अपना आधिकारिक उम्मीदवार बनाया है।

खास बात यह है कि इसी सीट पर जदयू ने भी अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा है। ऐसे में एक ही परिवार से जुड़े दो सदस्य अलग-अलग दलों के साथ राजनीतिक रूप से सक्रिय हैं। इस वजह से यह घटनाक्रम स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गया है।

मतदाताओं का मिजाज 

सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग माना जाता है। यहां शिक्षक मतदाता चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं। क्षेत्र में सारण के अलावा सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिले शामिल हैं।

इस चुनाव में केवल राजनीतिक दलों की स्थिति ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान, शिक्षक समुदाय के बीच संपर्क, शैक्षणिक पृष्ठभूमि और संगठनात्मक पकड़ भी असर डाल सकती है। ऐसे में जयराम यादव की उम्मीदवारी के बाद इन पहलुओं पर भी नजर रहेगी।

दिलचस्प मुकाबला

राजद में शामिल होते प्रो. जयराम यादव

जयराम यादव के राजद उम्मीदवार बनने और जदयू के अपने प्रत्याशी को मैदान में उतारने के बाद सारण शिक्षक सीट का मुकाबला दिलचस्प हो गया है। एक तरफ दो प्रमुख दलों के बीच चुनावी टक्कर होगी, तो दूसरी ओर एक ही परिवार से जुड़े पति-पत्नी की अलग-अलग राजनीतिक राह इस चुनाव को अतिरिक्त चर्चा दे रही है।

यह भी पढ़ें: सरकारी वकीलों की नियुक्ति पर सवाल, अवधेश पाण्डेय ने SC पद ठुकराया

स्तर पर इस समीकरण को लेकर तरह-तरह की राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, इसे किसी रणनीतिक समझ या राजनीतिक योजना के तौर पर देखना अभी जल्दबाजी होगी। चुनावी मैदान में उम्मीदवारों के प्रचार, शिक्षक मतदाताओं के बीच संपर्क और आने वाले दिनों में बनने वाले समीकरण से तस्वीर और स्पष्ट होगी।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ