राम मंदिर चंदा केस में 20 दिन बाद FIR दर्ज, SIT जांच में 8 लोगों पर मुकदमा
#अयोध्या | श्रीराम जन्मभूमि मंदिर चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ी के मामले में आखिरकार 20 दिनों बाद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद एसआईटी (विशेष जांच दल) की शुरुआती जांच के आधार पर यह कार्रवाई की गयी. श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की ओर से यह प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.
एफआईआर में कुल 8 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है, जबकि कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है. आरोपियों में ट्रस्ट सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा के रिश्तेदार अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा, ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के चालक रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, गणना कर्मी मनीष यादव, अविनाश शुक्ला, वरुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र और गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं.
इन सभी पर BNS की धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. हालांकि एफआईआर में ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों जैसे चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव के नाम शामिल नहीं हैं.
कुछ लोगों को हिरासत में लेने की सूचना
मामले में कुछ लोगों को हिरासत में लिए जाने की भी खबर सामने आई है. जानकारी के अनुसार लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, करुणेश और अविनाश को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, हालांकि पुलिस की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
कब आया था मामला सामने
राम मंदिर चढ़ावे में कथित चोरी या गड़बड़ी का मामला 5 जून को सामने आया था. इसके बाद ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने अंदरूनी स्तर पर जांच शुरू कराई और राशि रिकवरी के प्रयास किए गये थे.
7 जून को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए इस मामले को उठाया, जिसके बाद यह मामला सार्वजनिक रूप से चर्चा में आ गया.
PMO के संज्ञान के बाद तेज हुई जांच
मामले के सामने आने के बाद 9 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने भी इसका संज्ञान लिया. इसके बाद राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र अयोध्या पहुंचे और ट्रस्ट पदाधिकारियों से पूरे मामले की जानकारी ली.
नृपेंद्र मिश्र के दौरे के तीन दिन बाद राज्य सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर मामले की विस्तृत जांच के आदेश दिए.
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SIT ने दर्ज किए बयान, जांच के बाद FIR
SIT की टीम ने 15 जून को राम मंदिर पहुंचकर जांच शुरू की. टीम ने ट्रस्ट महासचिव चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा, व्यवस्थापक गोपाल राव और चंदा गणना से जुड़े कर्मचारियों के बयान दर्ज किए.
जांच के दौरान कुछ बयानों में विरोधाभास सामने आने के बाद एसआईटी ने रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत अन्य लोगों से भी पूछताछ की. शुरुआती जांच के आधार पर अब प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
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