सारण में डीपीओ अजीत अमर पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप, 32 महीने में 27 लाख वेतन, बैंक खातों में 2.51 करोड़ से अधिक के लेन-देन की जांच में सामने आई जानकारी; विभागीय कार्रवाई के लिए भेजी गई रिपोर्ट
#छपरा | सारण जिले के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (माध्यमिक शिक्षा, योजना एवं लेखा) अजीत अमर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने और वित्तीय अनियमितता के आरोपों को लेकर जांच के दायरे में आ गए हैं. मामले में उप विकास आयुक्त के नेतृत्व में गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव को सौंप दी है. रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए इसे शिक्षा विभाग के निदेशक प्रशासन को भेजा गया है.
32 महीने की अवधि में करोड़ों के लेन-देन की बात सामने आयी
जांच रिपोर्ट के अनुसार, करीब 32 माह की अवधि में डीपीओ अजीत अमर को वेतन के रूप में लगभग 27.43 लाख रुपये प्राप्त हुए. वहीं, इसी अवधि में उनके और उनकी पत्नी के बैंक खातों में 2.51 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन दर्ज होने की बात सामने आई है.
जांच में यह भी उल्लेख किया गया है कि उनकी पत्नी के नाम पर एकमा प्रखंड क्षेत्र में करीब 120 कट्ठा जमीन लगभग 41.50 लाख रुपये में खरीदी गयी. इसके अलावा मकान निर्माण में भी लाखों रुपये खर्च होने की जानकारी जांच समिति को मिली है.
संवेदक की शिकायत से शुरू हुआ मामला
बता दें कि मामले की शुरुआत जिला लोक शिकायत निवारण कोषांग में दर्ज एक शिकायत से हुई थी. जिसमें शिकायतकर्ता रवि कुमार राम ने आरोप लगाया था कि कार्य दिलाने के नाम पर डीपीओ द्वारा राशि की मांग की गयी.
शिकायत के अनुसार, 12.50 लाख रुपये की मांग किए जाने के बाद करीब 10.70 लाख रुपये नकद और लगभग 3.48 लाख रुपये डिजिटल माध्यम से भुगतान किए जाने का आरोप लगाया गया.
काम नहीं मिलने से बढ़ा विवाद
शिकायतकर्ता के अनुसार, राशि लेने के बाद संबंधित पदाधिकारी काम दिलाने के नाम पर टालमटोल करते रहे. बार-बार दबाव बनाने पर उन्होंने करीब 1.53 लाख रुपये डिजिटल माध्यम से लौटाए, लेकिन शेष लगभग 10.79 लाख रुपये वापस नहीं किए. शेष राशि मांगने पर धमकी देने और ब्लैकलिस्ट कराने की बात भी कही गयी.
वित्तीय लेन-देन के दस्तावेज जांच में शामिल
जांच के दौरान शिकायतकर्ता और डीपीओ के बीच हुए कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज और अन्य साक्ष्यों की जांच किए जाने की बात सामने आई है.
जांच समिति ने डीपीओ, उनकी पत्नी और अन्य संबंधित लोगों के बैंक खातों तथा संपत्तियों की विस्तृत जांच कराने की अनुशंसा की है. इसके लिए बैंक, निबंधन विभाग और अन्य सक्षम संस्थानों से जानकारी लेने की सिफारिश भी की गई है.
छह सदस्यीय टीम ने की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने छह सदस्यीय जांच टीम गठित की थी. टीम में उप विकास आयुक्त, वरीय कोषागार पदाधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता, पुलिस उपाधीक्षक, कार्यपालक अभियंता और जिला स्तरीय निगरानी सह-धावा दल के अधिकारी शामिल थे.
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जिला शिक्षा पदाधिकारी निशांत किरण के अनुसार, जांच रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए विभागीय मुख्यालय भेज दी गई है. अब विभागीय और कानूनी कार्रवाई पर निर्णय राज्य स्तर से लिया जाएगा.
(नोट: सभी आरोप जांच रिपोर्ट और शिकायत के आधार पर हैं। अंतिम निर्णय सक्षम जांच और विभागीय प्रक्रिया के बाद होगा।)
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