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छपरा नगर निगम: 6 पार्षदों के निलंबन पर सरकार सख्त, महापौर से जवाब तलब

छपरा नगर निगम में 6 पार्षदों के निलंबन पर सरकार सख्त, महापौर से मांगा जवाब; 31 जुलाई की बोर्ड बैठक भी स्थगित

छपरा नगर निगम में 6 पार्षदों के निलंबन मामले में सरकार के हस्तक्षेप के बाद खुशी जताते पार्षद एकता मंच के सदस्य।

छपरा, 31 जुलाई | छपरा नगर निगम में छह पार्षदों के निलंबन का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए महापौर से तीन दिनों के भीतर विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा है। साथ ही विभागीय निर्णय आने तक 31 जुलाई को प्रस्तावित नगर निगम बोर्ड की बैठक भी स्थगित कर दी गई है। विभाग ने प्रथम दृष्टया निलंबन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह स्पष्ट नहीं है कि कार्रवाई बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के अनुरूप की गई है या नहीं।

क्या है पूरा मामला?

22 जुलाई 2026 को नगर निगम बोर्ड की बैठक के दौरान हंगामा और अव्यवस्था होने के बाद महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने छह पार्षदों पर कथित रूप से भारी उत्पात, अलोकतांत्रिक एवं गैर-जिम्मेदाराना आचरण का आरोप लगाते हुए उन्हें 60 दिनों के लिए निगम की बैठकों से निलंबित कर दिया था।

निलंबित पार्षदों में शामिल हैं—

  1. श्वेता पांडेय (वार्ड-6)
  2. संजीव रंजन (वार्ड-14)
  3. संतोष कुमार (वार्ड-16)
  4. रमाकांत सिंह (वार्ड-22)
  5. राजा बाबू चौधरी (वार्ड-35)
  6. सुभी देवी (वार्ड-41)

सरकार ने क्यों उठाए सवाल?

छपरा नगर निगम में 6 पार्षदों के निलंबन मामले में बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी पत्र।

उपमहापौर रागिनी कुमारी समेत अन्य पार्षदों ने नगर विकास एवं आवास विभाग को पत्र भेजकर निलंबन की कार्रवाई को बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के विपरीत बताया था। उन्होंने निलंबन पर तत्काल रोक लगाने, संबंधित पार्षदों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी।

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इसके बाद विभाग ने 29 जुलाई को नगर आयुक्त को पत्र भेजकर कहा कि प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट नहीं है कि निलंबन की कार्रवाई अधिनियम की धारा 52(2) एवं 52(3) के अनुरूप की गई है या नहीं। विभाग ने यह भी कहा कि उपलब्ध अभिलेखों से यह स्पष्ट नहीं है कि निलंबन से पहले पार्षदों को चेतावनी देने अथवा अन्य वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया था। इसलिए नगर आयुक्त से पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए विस्तृत प्रतिवेदन उपलब्ध कराने को कहा गया है।

31 जुलाई की बोर्ड बैठक स्थगित

विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि महापौर से तीन दिनों के भीतर प्रतिवेदन मांगा गया है। ऐसे में विभागीय निर्णय आने तक 31 जुलाई को प्रस्तावित नगर निगम बोर्ड की बैठक स्थगित रहेगी।

महापौर का पक्ष

इस मामले पर महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता ने कहा कि विभाग के आदेश का विधिवत जवाब दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि निलंबन से संबंधित सभी आवश्यक साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं और उन्हें विभाग के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

उपमहापौर ने क्या कहा?

छपरा नगर निगम के महापौर लक्ष्मी नारायण गुप्ता, 6 पार्षदों के निलंबन

इस मामले पर उपमहापौर रागिनी कुमारी ने कहा कि महापौर द्वारा की गई कार्रवाई नियमों के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि यदि किसी पार्षद से गलती हुई थी तो पहले संबंधित साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने चाहिए थे, नियमानुसार चेतावनी दी जानी चाहिए थी और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होनी चाहिए थी। बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए सीधे निलंबन करना उचित नहीं है।

वहीं, विभाग का आदेश सामने आने के बाद पार्षद एकता मंच से जुड़े पार्षदों ने इसका स्वागत करते हुए इसे "न्याय की जीत और अन्याय की हार" बताया। उनका कहना है कि अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने की उम्मीद है।

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सरकार के हस्तक्षेप के बाद छपरा नगर निगम में छह पार्षदों के निलंबन का मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। अब महापौर के प्रतिवेदन, नगर आयुक्त की रिपोर्ट और नगर विकास एवं आवास विभाग के अंतिम निर्णय पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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