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IAS तुकाराम मुंढे कौन हैं? 25 तबादलों के बाद भी नहीं बदली सख्त कार्यशैली

25 तबादलों के बाद भी नहीं डिगे IAS तुकाराम मुंढे, अब महाराष्ट्र में मिलावट के खिलाफ चला रहे बड़ा अभियान

FDA आयुक्त एवं 2005 बैच के IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे, जो महाराष्ट्र में मिलावट के खिलाफ अभियान चला रहे हैं।

IAS Success Story : 2005 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपनी ईमानदार कार्यशैली, कड़े फैसलों और निडर प्रशासनिक रवैये के लिए पहचाने जाने वाले मुंढे को महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) का सचिव एवं आयुक्त नियुक्त किया है। नई जिम्मेदारी संभालते ही उन्होंने पूरे राज्य में मिलावटी खाद्य पदार्थों और बिना लाइसेंस संचालित प्रतिष्ठानों के खिलाफ व्यापक अभियान शुरू कर दिया है।

FDA की कमान संभालते ही शुरू हुआ अभियान

पदभार संभालने के बाद तुकाराम मुंढे ने राज्यभर में दूध, पनीर, मिठाई, मसाले, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांच का अभियान तेज कर दिया। FDA की टीमें बिना पूर्व सूचना के होटल, रेस्तरां, कैंटीन और खाद्य निर्माण इकाइयों का औचक निरीक्षण कर रही हैं। जहां भी मिलावट, गंदगी या खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की शिकायत मिल रही है, वहां तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद सरकारी कैंटीनों पर भी कार्रवाई

हाल के दिनों में FDA की कार्रवाई मुख्य रूप से निजी होटल, रेस्तरां और कैंटीनों पर केंद्रित थी। इसी दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि कार्रवाई केवल निजी प्रतिष्ठानों तक ही क्यों सीमित है? सरकारी कार्यालयों और राज्य सरकार द्वारा संचालित कैंटीनों की भी जांच की जानी चाहिए। अदालत की टिप्पणी के बाद तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA की टीम ने मुंबई हाईकोर्ट सहित कई सरकारी परिसरों की कैंटीनों का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कुछ कैंटीनें बिना FSSAI लाइसेंस के संचालित मिलीं, जिसके बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करते हुए उनका संचालन बंद करने के आदेश जारी किए गए।

12वीं के बाद लिया था IAS बनने का संकल्प

3 जून 1975 को जन्मे तुकाराम मुंढे ने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद ही सिविल सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था। स्नातक की पढ़ाई के बाद उन्होंने राजनीति विज्ञान में परास्नातक (एमए) किया और UPSC की तैयारी शुरू कर दी। वर्ष 2005 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक (AIR) 20 हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई।

सख्त प्रशासनिक अधिकारी के रूप में बनाई पहचान

करीब 20 वर्षों के प्रशासनिक करियर में तुकाराम मुंढे का लगभग 25 बार तबादला हुआ। वे सोलापुर, नासिक, नागपुर, नवी मुंबई समेत कई महत्वपूर्ण पदों पर रहे। जहां भी उनकी तैनाती हुई, उन्होंने भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की। राजनीतिक दबाव के बावजूद अपने फैसलों पर अडिग रहने की वजह से उनका बार-बार तबादला हुआ, लेकिन उन्होंने अपनी कार्यशैली से कभी समझौता नहीं किया। यही कारण है कि वे महाराष्ट्र में 'सिंघम IAS' के नाम से भी लोकप्रिय हैं।

युवाओं के लिए प्रेरणा

लगातार तबादलों और चुनौतियों के बावजूद तुकाराम मुंढे ने अपनी कार्यशैली से कभी समझौता नहीं किया। यही वजह है कि वे आज भी महाराष्ट्र के सबसे चर्चित और सख्त आईएएस अधिकारियों में गिने जाते हैं। उनकी प्रशासनिक यात्रा सिविल सेवा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणा मानी जाती है।

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