Advertisement

छपरा एसएनसीयू में नवजातों की सुरक्षा का नया मॉडल, माताओं को दी जा रही एफपीसी केयर की ट्रेनिंग

घर लौटने के बाद भी सुरक्षित रहेंगे नवजात, छपरा एसएनसीयू में माताओं को दी जा रही विशेष ट्रेनिंग

एफपीसी केयर और कंगारू मदर केयर से नवजातों की देखभाल में हो रहा सुधार, परिवार की बढ़ रही भागीदारी

#छपरा, 25 जून | समय से पहले जन्म लेने वाले, कम वजन वाले और गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए सदर अस्पताल छपरा के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में फैमिली पार्टिसिपेटरी केयर (एफपीसी) मॉडल को प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है. इसके तहत नवजातों की माताओं और परिवार के सदस्यों को विशेष प्रशिक्षण देकर शिशु की देखभाल में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार किया जा रहा है.

Chhapra SNСU FPC care training for newborns

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि नवजात का इलाज केवल अस्पताल तक सीमित नहीं होना चाहिए. अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर पर भी बच्चे की सही देखभाल हो, इसके लिए परिवार का प्रशिक्षित और जागरूक होना जरूरी है. इसी उद्देश्य से एसएनसीयू में माताओं को स्तनपान, कंगारू मदर केयर, संक्रमण से बचाव, तापमान नियंत्रण और नवजात में खतरे के लक्षण पहचानने की जानकारी दी जा रही है.

क्या है फैमिली पार्टिसिपेटरी केयर (एफपीसी)

एफपीसी यानी फैमिली पार्टिसिपेटरी केयर ऐसी व्यवस्था है जिसमें नवजात शिशु की देखभाल में माता-पिता और परिवार के सदस्यों को भी शामिल किया जाता है. इस मॉडल का उद्देश्य परिवार को इतना सक्षम बनाना है कि अस्पताल से घर जाने के बाद भी नवजात को बेहतर और सुरक्षित देखभाल मिल सके.

एफपीसी का प्रमुख हिस्सा कंगारू मदर केयर (केएमसी) है. इसमें मां या परिवार का कोई सदस्य बच्चे को अपनी छाती से लगाकर रखता है. इससे नवजात को गर्माहट, सुरक्षा और भावनात्मक जुड़ाव मिलता है. यह तरीका खासकर कम वजन और समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के लिए काफी लाभकारी माना जाता है.

Chhapra SNСU FPC care

माताओं को सिखाई जा रही नवजात देखभाल की तकनीक

एसएनसीयू में प्रशिक्षित नर्स और चिकित्सक माताओं को बच्चे को सही तरीके से स्तनपान कराने, सुरक्षित तरीके से पकड़ने, हाथों की स्वच्छता बनाए रखने और संक्रमण से बचाव के उपायों की जानकारी दे रहे हैं. इसके अलावा माताओं को यह भी बताया जा रहा है कि नवजात में सांस लेने में परेशानी, दूध नहीं पीना, शरीर का तापमान कम होना या सुस्ती जैसे खतरे के संकेत दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें.

एफपीसी से बढ़ रहा माता-पिता का आत्मविश्वास

एफपीसी मॉडल से माता-पिता बच्चे की बीमारी और इलाज की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं. नवजात के साथ समय बिताने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे घर लौटने के बाद बच्चे की देखभाल के लिए अधिक तैयार रहते हैं.

विशेषज्ञों ने बताया महत्वपूर्ण बदलाव

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप यादव ने बताया कि एफपीसी मॉडल नवजात देखभाल में बड़ा बदलाव ला रहा है. अस्पताल में प्रशिक्षण मिलने के बाद माता-पिता घर जाने के बाद भी बच्चे की बेहतर देखभाल कर पाते हैं. इससे संक्रमण का खतरा कम होता है और नवजात के स्वस्थ विकास में मदद मिलती है.

एसएनसीयू इंचार्ज ज्योति आइजक ने बताया कि एसएनसीयू टीम नियमित रूप से भर्ती नवजातों की माताओं को एफपीसी के तहत प्रशिक्षण देती है. कंगारू मदर केयर, स्तनपान और संक्रमण से बचाव पर विशेष जोर दिया जाता है.

शोध में भी सामने आए सकारात्मक परिणाम

एफपीसी मॉडल पर हुए अध्ययनों में पाया गया है कि इससे नवजातों की देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होता है और परिवार की भागीदारी बढ़ती है. शोध के अनुसार प्रशिक्षित माता-पिता घर लौटने के बाद भी बच्चों की बेहतर देखभाल कर पाते हैं.

एक अध्ययन के अनुसार 38 एसएनसीयू केंद्रों में एफपीसी मॉडल के बेहतर परिणाम देखने को मिले. इसमें बड़ी संख्या में माताओं को प्रशिक्षण मिला और विशेष स्तनपान तथा कंगारू मदर केयर का पालन बढ़ा.

नवजात स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने की पहल

विशेषज्ञों के अनुसार भारत जैसे देशों में जहां बड़ी संख्या में कम वजन और समय पूर्व जन्मे बच्चे जन्म लेते हैं, वहां एफपीसी मॉडल नवजात मृत्यु दर कम करने और बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है.

#Chapra #SadarHospital #FPCCare

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ